Wednesday, April 27, 2011

जोशी हत्याकांड में प्रज्ञा ने दिग्विजय को लपेटा


सुनील जोशी हत्याकांड में आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ने आरोप लगाया है कि इसमें उनका नहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का हाथ है। साध्वी ने मुंबई ले जाए जाते समय मंगलवार सुबह एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, मैं बेकसूर हूं, मुझे झूठा फंसाया जा रहा है। जोशी की हत्या में दिग्विजय सिंह का हाथ है। 2008 के मालेगांव धमाके में कथित भूमिका के बारे में प्रज्ञा ने कहा, मुझे साजिशन फंसाया गया, जिसमें सोनिया, दिग्विजय, हेमंत करकरे और शरद पवार का हाथ है। चारों को आपराधिक साजिश से संबद्ध आइपीसी की धारा 120-बी लगाकर अंदर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,यह विधर्मियों की चाल है और इसमें हमारे तथाकथित सत्ताधारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मैं संन्यासिन हूं और मैंने कोई साजिश नहीं की। मंैं राष्ट्रप्रेमी और राष्ट्रभक्त हूं। देश के लिए जीना और मरना जानती हूं। इस बात के जिक्र पर कि मध्य प्रदेश पुलिस ने सुनील जोशी हत्याकांड में उन पर साजिश रचने समेत विभिन्न आरोप लगाए हैं, उन्होंने कहा कि यह इनकी (पुलिस की) नादानी है और यहां की सरकार का निकम्मापन है। वह सचाई पता नहीं कर सकी और सीधे-सादे साधु-संतों को पकड़ लिया गया|

Monday, April 18, 2011

पाक में हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्मपरिवर्तन


पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि देश में नाबालिग हिन्दू लड़कियों का बलात् धर्मपरिवर्तन हो रहा है जिससे अल्पसंख्यक समुदाय बहुत चिंतित है। मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2010 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से मामले में हिन्दू लड़कियों का अपहरण और उनके साथ बलात्कार किया जाता है। बाद में उन्हें धर्मपरिवर्तन पर मजबूर किया जाता है। सिंध प्रांत विशेष कर देश की व्यापारिक राजधानी कराची में बलात् परिवर्तन की घटनाए हो रही है। पाकिस्तान की सीनेट की अल्पसंख्यक मामलों की स्थायी समिति ने अक्टूबर 2010 में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाए करने का आग्रह किया था। आयोग के कार्यदल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बलात् धर्मपरिवर्तन की घटनाएं केवल सिंध तक सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य भागों में भी ऐसा हो रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण या उसके साथ बलात्कार किया जाता है तथा बाद में यह दलील दी जाती है कि लड़की ने इस्लाम मजहब कबूल कर लिया है, उसकी मुस्लिम व्यक्ति से शादी हो गई है तथा वह अपने पुराने धर्म में लौटना नहीं चाहती। कार्यदल ने कहा कि अदालतें भी अल्पसंख्यक लड़की या उसके परिवार वालों के साथ इंसाफ नहीं करतीं। 12 या 13 वर्ष की लड़की को भी अभिभावकों के संरक्षण में नहीं छोड़ा जाता।

Saturday, April 16, 2011

अल्पसंख्यकों की स्थिति हो रही बद से बदतर


पाकिस्तान में पिछले कुछ साल से अल्पसंख्यक समुदाय के हालात चिंताजनक है। इनमें सिख, हिंदू और ईसाई धर्म के लोगों के साथ कुछ विशेष मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले कुछ वर्षो में अल्पसंख्यकों के हालात और बदतर होंगे। उल्लेखनीय है कि यहां आए दिन फिरौती के लिए हिंदुओं के अपहरण की घटनाएं होती रहती हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत से करीब पांच सौ हिंदू परिवार अपहरण के डर से वापस भारत लौट चुके हैं। कबीलाई इलाके ओरकजई में आतंकी संगठन ताबिलान के डर से करीब 25 प्रतिशत सिखों को उनके घर छोड़ने पर मजबूर किया गया। आतंकी हमलों में इस इलाके के 418 मुस्लिम भी मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट का कहना है कि हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ेंगे। पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में रहने वाले सिखों से तहरीक-ए-तालिबान ने जजिया (धर्म के आधार पर लगाया जाने वाला कर) वसूलने की भी कोशिश की। सदियों से चले आ रहे इस कर को न देने पर उन्हें घर छोड़ने की धमकी दी गई। इस वजह से ओरकजई के 25 से सौ सिख परिवारों को यह इलाका छोड़ना पड़ा। उसके बाद सेना द्वारा कार्रवाई करने के बाद ये लोग वापस लौट सके। मुस्लिमों के अहमदी समुदाय को 1974 में संविधान में संशोधन करके गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। 2010 में इसी समुदाय के 64 लोगों पर ईश निंदा कानून के आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। जबकि इस आरोप में बंद एक मुस्लिम और दो ईसाइयों की जेल में ही मौत हो गई थी|

Sunday, April 10, 2011

आतंकियों ने मढ़ा हिंदूवादी संगठनों पर हत्या का आरोप


आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने शनिवार को जमायत-ए-अहले-हदीस के प्रदेश प्रमुख मौलाना शौकत की हत्या में अपना हाथ होने से साफ इंकार किया। इन संगठनों ने मौलाना की हत्या के लिए बजरंग दल और अभिनव भारत जैसे हिंदूवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, आइजी कश्मीर ने आतंकी संगठनों के इस दावे को नकारते हुए कहा कि मौलाना की हत्या लश्कर ने ही की है। मौलाना शौकत की शुक्रवार को श्रीनगर में जमायत-ए-अहल-ए-हदीस की गावकदल स्थित मुख्य मस्जिद के बाहर साइकिल बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस विस्फोट के फौरन बाद लश्कर के प्रवक्ता डॉ. अब्दुल्ला गजनवी और हिजब के आतंकियों की स्थानीय पत्रकारों के साथ हुई बातचीत को रिकार्ड कर दावा किया है कि मौलाना की हत्या में इन्हीं आतंकी संगठनों का हाथ है। इस बीच शनिवार को लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने स्थानीय समाचार पत्रों के कार्यालयों में फोन कर दावा किया कि मौलाना शौकत की हत्या के पीछे बजरंग दल और अभिनव भारत जैसे संगठनों का हाथ है। हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सल्लाहुदीन ने भी गुलाम कश्मीर की राजधानी मुज्जफराबाद से स्थानीय अखबारों को भेजे अपने फैक्स में कहा कि मौलाना शौकत की हत्या कश्मीरियों को आपस में बांटने की साजिश के तहत की गई है। जिन लोगों ने यह हरकत की है, हम उन्हें बेनकाब करेंगे। वहीं, आइजी कश्मीर एसएम सहाय ने आतंकी संगठनों के दावे की निंदा करते हुए कहा कि ये लोग आम लोगों के गुस्से से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। आतंकियों ने मीरवाइज फारूक और काजी यासिर पर हमले के लिए सुरक्षाबलों को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन बाद में साफ हो गया कि इन्हें हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ने ही मारा था|

Friday, April 8, 2011

एनआइए ने अपने हाथ में ली तीन विस्फोटों की जांच


आतंकी गतिविधियों में दक्षिणपंथी समूहों की संदिग्ध भूमिका की पड़ताल शुरू करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालेगांव धमाका मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली है। अभिनव भारत नामक संगठन के सदस्यों पर इन विस्फोटों में शामिल होने का आरोप है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीबीआइ और राजस्थान सरकार की सहमति मिलने के बाद एनआइए ने मामले दर्ज किए। एनआइए अधिकारियों ने कहा कि मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालेगांव में 2006 में हुए विस्फोट के सिलिसिले में तीन मामले दर्ज किए गए हैं। 2008 के मालेगांव धमाके सहित अन्य मामलों में केस बाद में दर्ज किया जाएगा। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के आरोपी सुनील जोशी की हत्या की जांच सौंपने से इंकार कर कथित हिन्दू आतंकी समूहों से संबंधित सभी मामलों की संयुक्त जांच कराए जाने के गृह मंत्रालय के प्रयासों में अवरोध खड़ा कर दिया है। केंद्र ने मध्यप्रदेश सरकार से कहा था कि वह जोशी हत्याकांड की जांच एनआइए को सौंप दे, लेकिन राज्य सरकार ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में आरोप पत्र दायर हो चुका है। गृह मंत्रालय ने तीन मामलों की जांच एनआइए से कराने के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिनमें दक्षिणपंथी आतंकी समूहों की कथित संलिप्तता की बात कही जा रही है। एनआइए समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट की पहले से ही जांच कर रही है|