पाकिस्तान में पिछले कुछ साल से अल्पसंख्यक समुदाय के हालात चिंताजनक है। इनमें सिख, हिंदू और ईसाई धर्म के लोगों के साथ कुछ विशेष मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले कुछ वर्षो में अल्पसंख्यकों के हालात और बदतर होंगे। उल्लेखनीय है कि यहां आए दिन फिरौती के लिए हिंदुओं के अपहरण की घटनाएं होती रहती हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत से करीब पांच सौ हिंदू परिवार अपहरण के डर से वापस भारत लौट चुके हैं। कबीलाई इलाके ओरकजई में आतंकी संगठन ताबिलान के डर से करीब 25 प्रतिशत सिखों को उनके घर छोड़ने पर मजबूर किया गया। आतंकी हमलों में इस इलाके के 418 मुस्लिम भी मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट का कहना है कि हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ेंगे। पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में रहने वाले सिखों से तहरीक-ए-तालिबान ने जजिया (धर्म के आधार पर लगाया जाने वाला कर) वसूलने की भी कोशिश की। सदियों से चले आ रहे इस कर को न देने पर उन्हें घर छोड़ने की धमकी दी गई। इस वजह से ओरकजई के 25 से सौ सिख परिवारों को यह इलाका छोड़ना पड़ा। उसके बाद सेना द्वारा कार्रवाई करने के बाद ये लोग वापस लौट सके। मुस्लिमों के अहमदी समुदाय को 1974 में संविधान में संशोधन करके गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। 2010 में इसी समुदाय के 64 लोगों पर ईश निंदा कानून के आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। जबकि इस आरोप में बंद एक मुस्लिम और दो ईसाइयों की जेल में ही मौत हो गई थी|
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