पाकिस्तान से विसर्जन के लिए हरिद्वार लाई गई 135 हिंदुओं की अस्थियां 40 साल के लंबे इंतजार के बाद रविवार को विधि विधान के साथ गंगा में विसर्जित कर दी गयीं। इससे पहले पहले शहर में बैंड बाजों के साथ अस्थि कलश यात्रा निकाली गई। पाकिस्तान से आए बारह सदस्यीय दल ने हरिद्वार में अस्थियों को विसर्जित किया। उल्लेखनीय है कि भारत का वीजा न मिलने के चलते यह अस्थियां पिछले करीब चालीस साल से पाक में संभालकर रखी गई थी। यह अस्थि कलश शनिवार देर रात दिल्ली से हरिद्वार पहुंचे और इन्हें निष्काम सेवा सदन में रखा गया था। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने रविवार सुबह हरिद्वार के निष्काम सेवा सदन से अस्थि कलश यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बैंड-बाजों के साथ अस्थि कलश यात्रा का जगह जगह पर शहरवासियों ने स्वागत किया। दोपहर करीब दो बजे कनखल सती घाट में विधि-विधान से अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया गया। इसके लिए पाकिस्तान के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्र की अगुवाई में मंदिर के 12 सेवक हरिद्वार आए थे। अस्थि विसर्जन के मौके पर धर्मयात्रा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम, श्री देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र, कालिका पीठाधीश्र्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी, समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पाकिस्तान के कराची शहर मेंस्थित हिंदू क्रिमिनेशन ग्राउंड के एक कमरे में 135 दिवंगत व्यक्तियों के अस्थि कलश चालीस साल से रखे हुए थे। भारत का वीजा न मिल पाने के चलते इनका गंगा में विसर्जन नहीं हो पा रहा था। करीब चार साल पहले दिल्ली स्थित श्री देवोत्थान समिति को इस बारे में पता चला। फिर इन अस्थि कलशों को भारत लाकर गंगा में प्रवाहित करने की मुहिम शुरू हुई। पाकिस्तान के कराची शहर में श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्र से समिति ने संपर्क किया। तमाम प्रयासों के बाद आखिरकार इस मुहिम को आज मंजिल तक पहुंचाया गया।
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