Tuesday, February 15, 2011

हिंदू कट्टरपंथ अभी बड़ा खतरा नहीं : पिल्लै


सरकार का मानना है कि देश में हिंदू कट्टरपंथ (दक्षिणपंथी तत्वों) का उभरना चिंता की बात है लेकिन अभी यह बड़ा खतरा नहीं है। केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा, इन्हें फलने-फूलने दिया गया तो देश की सुरक्षा के लिए यह खतरा बन सकता है। पिल्लै ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, हमें जो भी खुफिया जानकारी मिल रही हैं उसके आधार पर फिलहाल दक्षिण कट्टरपंथी बड़ा खतरा नहीं हैं लेकिन कट्टरपंथी संगठनों की संख्या बढ़ना चिंता की बात तो है ही। स्वामी असीमानंद द्वारा 2006 के मालेगांव विस्फोट में हिन्दू समूहों के हाथ होने की बात स्वीकारे जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा, पूर्व के विस्फोटों में निर्दोष युवकों को फंसाने के लिए जो भी पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह पूछने पर कि मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस विस्फोट जैसे मामलों में अब दक्षिण कट्टरपंथी संगठनों के कथित रूप से शामिल होने का खुलासा होने के बाद ऐसे मामलों में शुरुआत में गिरफ्तार मुस्लिमों की रिहाई के संबंध में पूछे जाने पर पिल्लै ने कहा कि निर्दोष मुस्लिम युवकों को रिहा करने की प्रक्रिया चल रही है। गृह सचिव ने कहा कि दक्षिणपंथी हो या कोई अन्य, आतंकी देश का दुश्मन होता है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह के कट्टरपंथी समूहों के फलने फूलने का जोखिम नहीं उठा सकता है। हमारा मानना है कि दक्षिणपंथी कट्टरवादी समूह अभी बहुत सीमित हैं। ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटने का संकेत देते हुए पिल्लै ने कहा, हमारे दृष्टिकोण से आतंकवाद में संलग्न हर व्यक्ति देश का शत्रु है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, पाक से समझौता विस्फोट से जुड़ी जानकारी अवश्य साझा की जाएगी लेकिन आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, क्योंकि जांच अभी चल रही है। पाक समझौता कांड से जुड़ी जानकारी लगातार मांग रहा है। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है और इस सिलसिले में गिरफ्तार असीमानंद से पूछताछ की जा रही है। पिल्लै ने कहा कि अभी भी कई लोग गिरफ्तार नहीं हो पाए हैं। यह पूछने पर कि समझौता मामले सहित कुछ आतंकी घटनाओं में कथित तौर पर दक्षिणपंथी संगठनों के लिप्त होने से भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में किसी तरह का कोई असर तो नहीं पड़ेगा या फिर भारत को किसी तरह का दबाव तो नहीं झेलना होगा, पिल्लै ने कहा कि दबाव तो है लेकिन इसका बातचीत पर कोई असर नहीं होगा। क्योंकि लोकतंत्र में लोग इस तरह की बातों को अच्छी तरह समझते हैं। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हेमंत करकरे के बीच कथित बातचीत का मुंबई हमले से कोई लेना-देना था या नहीं, इस सवाल पर पिल्लै ने कहा कि मैं नहीं मानता। उनकी बातचीत का मुंबई आतंकी हमले से कोई लेना-देना नहीं है।

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