सुनील जोशी हत्याकांड में आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ने आरोप लगाया है कि इसमें उनका नहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का हाथ है। साध्वी ने मुंबई ले जाए जाते समय मंगलवार सुबह एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, मैं बेकसूर हूं, मुझे झूठा फंसाया जा रहा है। जोशी की हत्या में दिग्विजय सिंह का हाथ है। 2008 के मालेगांव धमाके में कथित भूमिका के बारे में प्रज्ञा ने कहा, मुझे साजिशन फंसाया गया, जिसमें सोनिया, दिग्विजय, हेमंत करकरे और शरद पवार का हाथ है। चारों को आपराधिक साजिश से संबद्ध आइपीसी की धारा 120-बी लगाकर अंदर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,यह विधर्मियों की चाल है और इसमें हमारे तथाकथित सत्ताधारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मैं संन्यासिन हूं और मैंने कोई साजिश नहीं की। मंैं राष्ट्रप्रेमी और राष्ट्रभक्त हूं। देश के लिए जीना और मरना जानती हूं। इस बात के जिक्र पर कि मध्य प्रदेश पुलिस ने सुनील जोशी हत्याकांड में उन पर साजिश रचने समेत विभिन्न आरोप लगाए हैं, उन्होंने कहा कि यह इनकी (पुलिस की) नादानी है और यहां की सरकार का निकम्मापन है। वह सचाई पता नहीं कर सकी और सीधे-सादे साधु-संतों को पकड़ लिया गया|
Wednesday, April 27, 2011
Monday, April 18, 2011
पाक में हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्मपरिवर्तन
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि देश में नाबालिग हिन्दू लड़कियों का बलात् धर्मपरिवर्तन हो रहा है जिससे अल्पसंख्यक समुदाय बहुत चिंतित है। मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2010 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से मामले में हिन्दू लड़कियों का अपहरण और उनके साथ बलात्कार किया जाता है। बाद में उन्हें धर्मपरिवर्तन पर मजबूर किया जाता है। सिंध प्रांत विशेष कर देश की व्यापारिक राजधानी कराची में बलात् परिवर्तन की घटनाए हो रही है। पाकिस्तान की सीनेट की अल्पसंख्यक मामलों की स्थायी समिति ने अक्टूबर 2010 में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाए करने का आग्रह किया था। आयोग के कार्यदल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बलात् धर्मपरिवर्तन की घटनाएं केवल सिंध तक सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य भागों में भी ऐसा हो रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण या उसके साथ बलात्कार किया जाता है तथा बाद में यह दलील दी जाती है कि लड़की ने इस्लाम मजहब कबूल कर लिया है, उसकी मुस्लिम व्यक्ति से शादी हो गई है तथा वह अपने पुराने धर्म में लौटना नहीं चाहती। कार्यदल ने कहा कि अदालतें भी अल्पसंख्यक लड़की या उसके परिवार वालों के साथ इंसाफ नहीं करतीं। 12 या 13 वर्ष की लड़की को भी अभिभावकों के संरक्षण में नहीं छोड़ा जाता।
Saturday, April 16, 2011
अल्पसंख्यकों की स्थिति हो रही बद से बदतर
पाकिस्तान में पिछले कुछ साल से अल्पसंख्यक समुदाय के हालात चिंताजनक है। इनमें सिख, हिंदू और ईसाई धर्म के लोगों के साथ कुछ विशेष मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले कुछ वर्षो में अल्पसंख्यकों के हालात और बदतर होंगे। उल्लेखनीय है कि यहां आए दिन फिरौती के लिए हिंदुओं के अपहरण की घटनाएं होती रहती हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत से करीब पांच सौ हिंदू परिवार अपहरण के डर से वापस भारत लौट चुके हैं। कबीलाई इलाके ओरकजई में आतंकी संगठन ताबिलान के डर से करीब 25 प्रतिशत सिखों को उनके घर छोड़ने पर मजबूर किया गया। आतंकी हमलों में इस इलाके के 418 मुस्लिम भी मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट का कहना है कि हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ेंगे। पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में रहने वाले सिखों से तहरीक-ए-तालिबान ने जजिया (धर्म के आधार पर लगाया जाने वाला कर) वसूलने की भी कोशिश की। सदियों से चले आ रहे इस कर को न देने पर उन्हें घर छोड़ने की धमकी दी गई। इस वजह से ओरकजई के 25 से सौ सिख परिवारों को यह इलाका छोड़ना पड़ा। उसके बाद सेना द्वारा कार्रवाई करने के बाद ये लोग वापस लौट सके। मुस्लिमों के अहमदी समुदाय को 1974 में संविधान में संशोधन करके गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। 2010 में इसी समुदाय के 64 लोगों पर ईश निंदा कानून के आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। जबकि इस आरोप में बंद एक मुस्लिम और दो ईसाइयों की जेल में ही मौत हो गई थी|
Sunday, April 10, 2011
आतंकियों ने मढ़ा हिंदूवादी संगठनों पर हत्या का आरोप
आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने शनिवार को जमायत-ए-अहले-हदीस के प्रदेश प्रमुख मौलाना शौकत की हत्या में अपना हाथ होने से साफ इंकार किया। इन संगठनों ने मौलाना की हत्या के लिए बजरंग दल और अभिनव भारत जैसे हिंदूवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, आइजी कश्मीर ने आतंकी संगठनों के इस दावे को नकारते हुए कहा कि मौलाना की हत्या लश्कर ने ही की है। मौलाना शौकत की शुक्रवार को श्रीनगर में जमायत-ए-अहल-ए-हदीस की गावकदल स्थित मुख्य मस्जिद के बाहर साइकिल बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस विस्फोट के फौरन बाद लश्कर के प्रवक्ता डॉ. अब्दुल्ला गजनवी और हिजब के आतंकियों की स्थानीय पत्रकारों के साथ हुई बातचीत को रिकार्ड कर दावा किया है कि मौलाना की हत्या में इन्हीं आतंकी संगठनों का हाथ है। इस बीच शनिवार को लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने स्थानीय समाचार पत्रों के कार्यालयों में फोन कर दावा किया कि मौलाना शौकत की हत्या के पीछे बजरंग दल और अभिनव भारत जैसे संगठनों का हाथ है। हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सल्लाहुदीन ने भी गुलाम कश्मीर की राजधानी मुज्जफराबाद से स्थानीय अखबारों को भेजे अपने फैक्स में कहा कि मौलाना शौकत की हत्या कश्मीरियों को आपस में बांटने की साजिश के तहत की गई है। जिन लोगों ने यह हरकत की है, हम उन्हें बेनकाब करेंगे। वहीं, आइजी कश्मीर एसएम सहाय ने आतंकी संगठनों के दावे की निंदा करते हुए कहा कि ये लोग आम लोगों के गुस्से से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। आतंकियों ने मीरवाइज फारूक और काजी यासिर पर हमले के लिए सुरक्षाबलों को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन बाद में साफ हो गया कि इन्हें हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ने ही मारा था|
Friday, April 8, 2011
एनआइए ने अपने हाथ में ली तीन विस्फोटों की जांच
आतंकी गतिविधियों में दक्षिणपंथी समूहों की संदिग्ध भूमिका की पड़ताल शुरू करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालेगांव धमाका मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली है। अभिनव भारत नामक संगठन के सदस्यों पर इन विस्फोटों में शामिल होने का आरोप है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीबीआइ और राजस्थान सरकार की सहमति मिलने के बाद एनआइए ने मामले दर्ज किए। एनआइए अधिकारियों ने कहा कि मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालेगांव में 2006 में हुए विस्फोट के सिलिसिले में तीन मामले दर्ज किए गए हैं। 2008 के मालेगांव धमाके सहित अन्य मामलों में केस बाद में दर्ज किया जाएगा। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के आरोपी सुनील जोशी की हत्या की जांच सौंपने से इंकार कर कथित हिन्दू आतंकी समूहों से संबंधित सभी मामलों की संयुक्त जांच कराए जाने के गृह मंत्रालय के प्रयासों में अवरोध खड़ा कर दिया है। केंद्र ने मध्यप्रदेश सरकार से कहा था कि वह जोशी हत्याकांड की जांच एनआइए को सौंप दे, लेकिन राज्य सरकार ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में आरोप पत्र दायर हो चुका है। गृह मंत्रालय ने तीन मामलों की जांच एनआइए से कराने के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिनमें दक्षिणपंथी आतंकी समूहों की कथित संलिप्तता की बात कही जा रही है। एनआइए समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट की पहले से ही जांच कर रही है|
Friday, April 1, 2011
वनवास और त्याग से साकार होगा रामराज्य
भारत विकास संगम के समापन सत्र में संगम के संरक्षक माननीय के.एन. गोविन्दाचार्य ने मंचस्थ पूज्य सिद्धेश्वर स्वामी, प्रमुख संतजन, सम्मानित अतिथि गण, मातृ शक्ति और देश के कोने-कोने से आई सज्जन शक्ति के अभिवादन के साथ अपने उद्बोध्न की शुरुआत की। प्रस्तुत है उसके मुख्य अंश…
भारत विकास संगम का 10 दिवसीय अधिवेशन अपने समापन की तरफ आ रहा है। इस मंच से प्रबुद्धजनों ने जो विचार प्रकट किये हैं उनके प्रति मैं पूरा सम्मान प्रकट करता हूं। यहां के आमजनों के मन में भी कार्यक्रम के आयोजन को लेकर जो सद्भाव और पवित्रता प्रकट हुई है, वही कार्यक्रम के आयोजन की सफलता का प्रेरणादायी तत्त्व है। पूरे कार्यक्रम की सफलता किसी एक विचारधारा, विद्यालय अथवा व्यक्ति के योगदान से नहीं बल्कि सम्पूर्ण जनता की ताकत तथा साहस पूर्ण पहल का परिचय देती है। पथ का अंतिम लक्ष्य नहीं है सिंहासन चढ़ते जाना यह गीत हमारे कार्य की प्रेरणा होना चाहिए। ‘समाज आगे, सत्ता पीछे, तभी होगा स्वस्थ विकास’ यह भारत विकास संगम का मूल मंत्र है। समाज में अनेकों लोग काम कर रहें हैं और एक आंकड़े के अनुसार लगभग 6 लाख गांवों में 21 लाख एनजीओ काम कर रहे हैं, फिर भी समाज में विविध समस्याओं की उपस्थिति तथा निरंतर विद्रूप होती व्यवस्था हमारे लिये एक चुनौती बन कर खड़ी है। इसलिए हमारा लक्ष्य केवल संगठन में वृदि करना नहीं होना चाहिए। इस अधिवेशन में आये हुए समस्त सज्जन शक्ति से हमारा निवेदन है कि जब हम यहां से लौटकर जायें तो यह सोच कर जायें कि हमारे केन्द्र पर अब कोई गरीबी रेखा के नीचे नहीं रहेगा, कृषि का उत्पादन दो गुना होगा, गाय-बैल की संख्या दोगुनी होगी, हम एक लाख नशामुक्त गांव खड़ा करेंगे, खून की कमी से कोई महिला नहीं मरेगी, कुपोषण का शिकार कोई बच्चा नहीं मिलेगा, यह संकल्प लेकर जाना होगा। सभी की सामूहिकता तथा संगठनों की आपसी संवाद, सहमति एवं सहकार के साथ ही ऐसी स्थिति खड़ी हो सकती है। यदि हम ठान लें तो 10 वर्षों के अन्दर इन बुराइयों का मूलोच्छेद हो सकता है। हमें इस अधिवेशन के पश्चात् अपने कार्य की एक वर्ष के अन्दर की तैयारी करनी है। समस्त जिलों में जिला विकास संगम करना है, सबको-भोजन सबको काम की योजना बना कर उसका क्रियान्वयन करना है। आप सब संगम के इस समापन सत्र से बड़ा लक्ष्य लेकर अपने-अपने क्षेत्र में जायें, यह हमारी अपेक्षा है। देश की सज्जन शक्ति के हजारों सक्रिय संगठनों/समाजसेवियों की एक ‘डायरेक्ट्री’ मार्च 2011 तक बनाई जानी चाहिए। कौन-कौन से लोग किस-किस क्षेत्रा में कैसा कार्य कर रहें हैं, ये सभी जानकारी सर्वसुलभ हो, तभी एक दूसरे के कार्य में सहकार बढ़ेगा। मैं अपील करता हूं कि अपने कार्यों व संस्थाओं का एक संक्षिप्त विवरण अवश्य उपलब्ध कराते जाएं।
यह सम्मेलन देश में तब हो रहा है जब चारों तरफ कहीं विकीलीक्स की, तो कहीं नीरा राडिया के ‘लीक्स’ की चर्चा हो रही है। ऐसे समय में सम्मेलन में 10 दिनों तक देश के प्रत्येक कोने से आये हुई सज्जन शक्ति के द्वारा भारत को दुनिया का सरताज बनाने के लिए आह्वान किया जा रहा है। देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है। अच्छे प्रयासों को भी समाज के पटल पर लाने की आवश्यकता है। आज समाज में चुनौतियां भी बहुत हैं, लेकिन चुनौतियां तो वीर पुरुषों के लिए अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती हैं। जिस तरह इस सम्मेलन में जुटे प्रमुख लोगों ने अपने सहयोग व समर्थन की सदाशयता दिखायी है, उससे सिद्ध है कि अच्छे कार्यों में सहयोग करने वालों की कमी कहीं भी नहीं होती है।
भारत को यदि दुनिया की महाशक्ति के रूप में देखना है तो ऐसी सोच रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान के महारथ को भगवान जगन्नाथ की रस्सी की तरह खींचने का काम करना होगा, जिसमें प्रयास तो सबका होता है परंतु रथ का संचालन ईश्वरीय सद्प्रेरणा से निरंतरता पूर्वक होता है। हम भी इस महान अभियान में बड़े कामों के लिए एक उपकरण बनें, यह सभी की इच्छा होनी चाहिए।
हमें छोटी-छोटी पांच बातों पर भी ध्यान देने की जरुरत है- पहली यह कि जाति, क्षेत्र, भाषा आदि भेदों को छोड़कर हमें रोटी, रिहाइश और रिश्ते की नयी परिभाषा व प्रयोग अनुपादित करना होगा। दूसरा यह कि अपने जीवन के आवश्यक रोजमर्रा के सामानों का उपयोग हम चाहत से देशी, जरूरत से स्वदेशी करें तथा मजबूरी में ही विदेशी करें और मजबूरी कम होती चले, इसका निरंतर प्रयास करें। तीसरा यह कि आज सीमा के घुसपैठ पर सभी जन दिलचस्पी लेकर बातें करतें हैं और मौखिक चिन्ता प्रकट करते हैं लेकिन इसके साथ ही हमें अपने मुहल्ले व पास-पड़ोस की भी चिन्ता करनी होगी और पड़ोसियों से अच्छे सम्बन्ध विकसित करने होंगे। चौथी यह कि गलत तरीके से अमीर बनने के लालच पर लगाम लगाना होगा। हमें यह तय करना होगा कि हमारी इमारत एक मंजिल कम बने मगर उसकी आधारशिला पवित्र, पारदर्शी और मजबूत हो। पांचवी यह कि हम जो भी करें उसे परिपूर्णता के साथ करें। हमारे छोटे-छोटे कामों में भी परिपूर्णता दिखनी चाहिए। उदाहरण के लिए हर रोटी गोल बने, इसका निरंतर प्रयास रोटी बनाने वाले हाथों को करना होगा।
सार्वजनिक जीवन में गलत तरीके से पैसे लेकर सही काम किया जाना असम्भव है। गलत तरीके से पैसा अर्जित करने वालों को जीवन का वास्तविक सम्मान कभी भी नहीं मिल सकता है। कुछ दिग्भ्रमित लोगों द्वारा ऐसे लोगों को सम्मानित किये जाने का प्रयास यदि किया जा रहा हो तो उसकी सामाजिक स्तर पर निन्दा और तिरस्कार होना चाहिए। समाज में जो भी अच्छे कार्य करने वाले लोग हैं उन्हें हमें निरंतर जोड़कर चलते रहना होगा। जब एक दूसरे का सहकार होगा तभी सार्थकता भी अपनी परिपूर्णता की तरफ अग्रसर होगी।
राम महत्त्वपूर्ण हैं लेकिन राम से बड़ा राम का नाम है। राम के नाम से बड़ा राम का काम है और राम का जो काम है वही रामराज्य की स्थापना है। यदि हम रामराज्य की कामना करते हैं तब रामराज्य की स्थापना के लिए हमें वनवास और त्याग करना होगा। रामराज्य की स्थापना के लिए यदि 14 वर्ष तक वनवास भोगने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम चाहिए तो भरत की तरह 14 वर्ष तक खड़ांऊ के माध्यम से त्याग का अप्रतिम उदाहरण देते हुए राज्य चलाने का साहस रखने वाला भी चाहिए। रामराज्य ऐसे नहीं आता है, रामराज्य तो तब आता है जब राम वानरों से, आदिवासियों से, शबरी से सबसे जुड़ते हैं।
व्यवस्था के परिवर्तन में तथा रामराज्य की स्थापना में हमेशा लड़ाई की शुरुआत और अन्त आम आदमी करता है। वह आम आदमी कभी हनुमान, सुग्रीव, अंगद, जामवन्त आदि के रूप में भी हो सकता है। आज देश का सामान्य आदमी ही रामराज्य लाने में सक्षम है। राम-रावण युद्ध के दौरान देवतागण केवल जय हो! जय हो! का उद्घोष कर रहे थे। उन्होंने यह नहीं सुनिश्चित किया था कि किसकी जय हो? राम की अथवा रावण की? वे तब भी युद्ध के दौरान राम की जय हो, बोलने में रावण की शक्ति से भयकंपित थे। इसलिए आज हमें देवताओं की भूमिका में जय हो! करने वालों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। जब आपके कार्यों की जय होगी तो देवतागण खुद जयगान करेंगे।
मेरा विश्वास है कि युद्ध साधनों से नहीं अपनी साधना से जीता जाता है। हमें साधन की तरफ अकर्मण्यतापूर्वक देखने की आवश्यकता नहीं। हमें अपनी साधना के द्वारा सभी साधनों को जुटा कर सम्पूर्ण परिवर्तन के युद्ध की शुरुआत करनी होगी। साधना के बल पर शुरू हुआ यह युद्ध निश्चय ही कालजयी विजय दिलाएगा। तब समाज आगे होगा और सत्ता पीछे होगी।
मंदराचल मंथन के समय बार-बार पर्वत धरातल में नीचे चला जाता था। देवताओं और दानवों को इस मंथन में जब असुविधा होने लगी तो भगवान ने कूर्मावतार लिया। मंदराचल के आधार के रूप में भगवान ने अपने को कछुए के रूप में स्थापित किया। आज जब देश में सभी सज्जन शक्तियों के सम्मेलन और सामाजिक समस्याओं पर एक वृहद् मंथन का आयोजन किया जा रहा है, ऐसे में भारत विकास संगम की भूमिका कूर्मावतार की तरह से समुपस्थित हुई है।
10 वर्ष के अन्दर भारत में समृद्ध और संस्कृति का समग्र रूप लाने में ईश्वर हम सभी को प्रेरणा, साहस तथा कौशल दे, यही प्रार्थना करते हुए मैं अपनी बात पूरी करता हूं।
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