Sunday, March 6, 2011

मालेगांव धमाके में एटीएस ने बिना सबूत बनाए आरोपी


सीबीआइ ने वर्ष 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट की नए सिरे से जांच की मांग के बीच रविवार को संकेत दिया कि मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने इस मामले को सुलझाने में काफी जल्दी दिखाई। इसका नतीजा यह हुआ कि एटीएस ने दो लोगों को इस बात का ध्यान रखे बिना ही आरोपी बना दिया कि घटना के समय उनमें से एक जेल में था, जबकि दूसरा शहर से 700 किलोमीटर दूर। एटीएस के आरोपपत्र में दावा किया गया है कि विस्फोट कांड के मुख्य आरोपी में से एक मोहम्मद जाहिद आठ सितंबर को मालेगांव में मौजूद था जब तीन विस्फोट हुए जिसमें 35 से अधित व्यक्तियों की मौत हो गई थी। सीबीआइ मालेगांव विस्फोट की गुत्थियों को सुलझाने की कोशिश कर रही है। उसके पास इस बात को प्रमाणित करने के लिए प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं कि विस्फोट वाले दिन जाहिद मालेगांव से 700 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व कर रहा था। सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जाहिद पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामी मूवमेंट ऑफ इंडिया की गतिविधियों में शामिल था। बहरहाल, वह विस्फोट स्थल पर मौजूद नहीं था। सीबीआइ ने यह भी दावा किया उसके पास धमाके के महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी के बयान भी दर्ज हैं। प्रत्यक्षदर्शी ने जांच एजेंसी को बताया था कि मालेगांव में बम रखने वाले को दाढ़ी नहीं थी, जबकि एटीएस ने जिसे आरोपी बनाया है उसने सालों से दाढ़ी बढ़ा रखी है। सीबीआइ को और भी कई ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चलता है कि एटीएस ने जांच में जल्दबाजी दिखाई। गौरतलब है कि इस सारी जांच में उस समय नया मोड़ आ गया था जब संघ से जुड़े स्वामी असीमानंद ने मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान दिया दिया कि मालेगांव विस्फोट के पीछे हिंदू कट्टरपंथियों का हाथ है। इसके बाद इस पूरे मामले की मुंबई एटीएस से लेकर जांच सीबीआइ को सौंपी गई|

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