Tuesday, March 22, 2011

मस्जिद के लिए अलग जमीन


 इसी साल जनवरी में जंगपुरा इलाके में अतिक्रमण करके बनाए गए धार्मिक स्थल को गिराने के मामले में सोमवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने उच्च न्यायालय को बताया है कि वह इस धार्मिक स्थल के बदले में इसका रखरखाव करने वाली नूर चैरिटेबल सोसायटी को एक अलग स्थान पर चार सौ गज जमीन देने के लिए तैयार है। डीडीए की तरफ से दी गई इन दलीलों के बाद न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी ने सोसायटी को कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करे। जब उनको नई जमीन मिल जाए तो वह उस जगह को खाली कर दे जिस पर पहले धार्मिक स्थल बना हुआ था। तब तक इस स्थल पर पुराने आदेश के अनुसार दस लोग ही नमाज पढ़े। डीडीए की तरफ से यह भी बताया गया कि उन्होंने गिराए गए धार्मिक स्थल के चारों और दीवार का निर्माण कर दिया है। इतना ही नहीं इस स्थल से सौ मीटर की दूरी पर वह सोसायटी को चार सौ गज जमीन देने को तैयार है। पूर्व में अदालत के आदेश के बाद डीडीए ने उसकी जमीन पर बने धार्मिक स्थल को गिरा दिया था। परंतु स्थानीय लोगों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद अदालत ने डीडीए को कहा था कि वह इस जमीन पर चार दीवारी कर दे। दो माह के अंदर समस्या का समाधान निकाला जाए तब तक दस लोग इस स्थल पर नमाज पढ़ सकेंगे। याचिकाकर्ता की तरफ से एक बार फिर कहा गया कि अदालत के पूर्व में दिए गए आदेश का पालन नहीं हो रहा है। जबकि सोसायटी की तरफ से बताया गया कि वह अदालत के आदेश का पालन करेंगे और दस से ज्यादा लोग नमाज नहीं पढ़ेगे। जिस पर अदालत ने सोसायटी व दिल्ली वक्फ बोर्ड को कहा कि वह अदालत के आदेश का आदर करे। साथ ही डीडीए को कहा कि उन्होंने जमीन के चारों तरफ दीवार बनाई है। अगर कोई उसे तोड़ता है तो उसे दोबारा बनाना उनकी जिम्मेदारी है। इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि अदालत को कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं देगी। सोसायटी व बोर्ड के वकीलों ने इस विषय पर विचार करने और कोई समाधान निकालने के लिए अदालत से कुछ समय दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह कानून का पालन करेंगे। जिस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 16 मई तक टाल दी। अदालत जंगपुरा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है|

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