Wednesday, April 27, 2011

जोशी हत्याकांड में प्रज्ञा ने दिग्विजय को लपेटा


सुनील जोशी हत्याकांड में आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ने आरोप लगाया है कि इसमें उनका नहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का हाथ है। साध्वी ने मुंबई ले जाए जाते समय मंगलवार सुबह एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, मैं बेकसूर हूं, मुझे झूठा फंसाया जा रहा है। जोशी की हत्या में दिग्विजय सिंह का हाथ है। 2008 के मालेगांव धमाके में कथित भूमिका के बारे में प्रज्ञा ने कहा, मुझे साजिशन फंसाया गया, जिसमें सोनिया, दिग्विजय, हेमंत करकरे और शरद पवार का हाथ है। चारों को आपराधिक साजिश से संबद्ध आइपीसी की धारा 120-बी लगाकर अंदर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,यह विधर्मियों की चाल है और इसमें हमारे तथाकथित सत्ताधारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मैं संन्यासिन हूं और मैंने कोई साजिश नहीं की। मंैं राष्ट्रप्रेमी और राष्ट्रभक्त हूं। देश के लिए जीना और मरना जानती हूं। इस बात के जिक्र पर कि मध्य प्रदेश पुलिस ने सुनील जोशी हत्याकांड में उन पर साजिश रचने समेत विभिन्न आरोप लगाए हैं, उन्होंने कहा कि यह इनकी (पुलिस की) नादानी है और यहां की सरकार का निकम्मापन है। वह सचाई पता नहीं कर सकी और सीधे-सादे साधु-संतों को पकड़ लिया गया|

Monday, April 18, 2011

पाक में हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्मपरिवर्तन


पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि देश में नाबालिग हिन्दू लड़कियों का बलात् धर्मपरिवर्तन हो रहा है जिससे अल्पसंख्यक समुदाय बहुत चिंतित है। मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2010 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से मामले में हिन्दू लड़कियों का अपहरण और उनके साथ बलात्कार किया जाता है। बाद में उन्हें धर्मपरिवर्तन पर मजबूर किया जाता है। सिंध प्रांत विशेष कर देश की व्यापारिक राजधानी कराची में बलात् परिवर्तन की घटनाए हो रही है। पाकिस्तान की सीनेट की अल्पसंख्यक मामलों की स्थायी समिति ने अक्टूबर 2010 में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाए करने का आग्रह किया था। आयोग के कार्यदल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बलात् धर्मपरिवर्तन की घटनाएं केवल सिंध तक सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य भागों में भी ऐसा हो रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण या उसके साथ बलात्कार किया जाता है तथा बाद में यह दलील दी जाती है कि लड़की ने इस्लाम मजहब कबूल कर लिया है, उसकी मुस्लिम व्यक्ति से शादी हो गई है तथा वह अपने पुराने धर्म में लौटना नहीं चाहती। कार्यदल ने कहा कि अदालतें भी अल्पसंख्यक लड़की या उसके परिवार वालों के साथ इंसाफ नहीं करतीं। 12 या 13 वर्ष की लड़की को भी अभिभावकों के संरक्षण में नहीं छोड़ा जाता।

Saturday, April 16, 2011

अल्पसंख्यकों की स्थिति हो रही बद से बदतर


पाकिस्तान में पिछले कुछ साल से अल्पसंख्यक समुदाय के हालात चिंताजनक है। इनमें सिख, हिंदू और ईसाई धर्म के लोगों के साथ कुछ विशेष मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले कुछ वर्षो में अल्पसंख्यकों के हालात और बदतर होंगे। उल्लेखनीय है कि यहां आए दिन फिरौती के लिए हिंदुओं के अपहरण की घटनाएं होती रहती हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान प्रांत से करीब पांच सौ हिंदू परिवार अपहरण के डर से वापस भारत लौट चुके हैं। कबीलाई इलाके ओरकजई में आतंकी संगठन ताबिलान के डर से करीब 25 प्रतिशत सिखों को उनके घर छोड़ने पर मजबूर किया गया। आतंकी हमलों में इस इलाके के 418 मुस्लिम भी मारे जा चुके हैं। रिपोर्ट का कहना है कि हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ेंगे। पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में रहने वाले सिखों से तहरीक-ए-तालिबान ने जजिया (धर्म के आधार पर लगाया जाने वाला कर) वसूलने की भी कोशिश की। सदियों से चले आ रहे इस कर को न देने पर उन्हें घर छोड़ने की धमकी दी गई। इस वजह से ओरकजई के 25 से सौ सिख परिवारों को यह इलाका छोड़ना पड़ा। उसके बाद सेना द्वारा कार्रवाई करने के बाद ये लोग वापस लौट सके। मुस्लिमों के अहमदी समुदाय को 1974 में संविधान में संशोधन करके गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। 2010 में इसी समुदाय के 64 लोगों पर ईश निंदा कानून के आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। जबकि इस आरोप में बंद एक मुस्लिम और दो ईसाइयों की जेल में ही मौत हो गई थी|

Sunday, April 10, 2011

आतंकियों ने मढ़ा हिंदूवादी संगठनों पर हत्या का आरोप


आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने शनिवार को जमायत-ए-अहले-हदीस के प्रदेश प्रमुख मौलाना शौकत की हत्या में अपना हाथ होने से साफ इंकार किया। इन संगठनों ने मौलाना की हत्या के लिए बजरंग दल और अभिनव भारत जैसे हिंदूवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, आइजी कश्मीर ने आतंकी संगठनों के इस दावे को नकारते हुए कहा कि मौलाना की हत्या लश्कर ने ही की है। मौलाना शौकत की शुक्रवार को श्रीनगर में जमायत-ए-अहल-ए-हदीस की गावकदल स्थित मुख्य मस्जिद के बाहर साइकिल बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस विस्फोट के फौरन बाद लश्कर के प्रवक्ता डॉ. अब्दुल्ला गजनवी और हिजब के आतंकियों की स्थानीय पत्रकारों के साथ हुई बातचीत को रिकार्ड कर दावा किया है कि मौलाना की हत्या में इन्हीं आतंकी संगठनों का हाथ है। इस बीच शनिवार को लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने स्थानीय समाचार पत्रों के कार्यालयों में फोन कर दावा किया कि मौलाना शौकत की हत्या के पीछे बजरंग दल और अभिनव भारत जैसे संगठनों का हाथ है। हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सल्लाहुदीन ने भी गुलाम कश्मीर की राजधानी मुज्जफराबाद से स्थानीय अखबारों को भेजे अपने फैक्स में कहा कि मौलाना शौकत की हत्या कश्मीरियों को आपस में बांटने की साजिश के तहत की गई है। जिन लोगों ने यह हरकत की है, हम उन्हें बेनकाब करेंगे। वहीं, आइजी कश्मीर एसएम सहाय ने आतंकी संगठनों के दावे की निंदा करते हुए कहा कि ये लोग आम लोगों के गुस्से से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। आतंकियों ने मीरवाइज फारूक और काजी यासिर पर हमले के लिए सुरक्षाबलों को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन बाद में साफ हो गया कि इन्हें हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ने ही मारा था|

Friday, April 8, 2011

एनआइए ने अपने हाथ में ली तीन विस्फोटों की जांच


आतंकी गतिविधियों में दक्षिणपंथी समूहों की संदिग्ध भूमिका की पड़ताल शुरू करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालेगांव धमाका मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली है। अभिनव भारत नामक संगठन के सदस्यों पर इन विस्फोटों में शामिल होने का आरोप है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को सीबीआइ और राजस्थान सरकार की सहमति मिलने के बाद एनआइए ने मामले दर्ज किए। एनआइए अधिकारियों ने कहा कि मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और मालेगांव में 2006 में हुए विस्फोट के सिलिसिले में तीन मामले दर्ज किए गए हैं। 2008 के मालेगांव धमाके सहित अन्य मामलों में केस बाद में दर्ज किया जाएगा। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने समझौता एक्सप्रेस विस्फोट के आरोपी सुनील जोशी की हत्या की जांच सौंपने से इंकार कर कथित हिन्दू आतंकी समूहों से संबंधित सभी मामलों की संयुक्त जांच कराए जाने के गृह मंत्रालय के प्रयासों में अवरोध खड़ा कर दिया है। केंद्र ने मध्यप्रदेश सरकार से कहा था कि वह जोशी हत्याकांड की जांच एनआइए को सौंप दे, लेकिन राज्य सरकार ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में आरोप पत्र दायर हो चुका है। गृह मंत्रालय ने तीन मामलों की जांच एनआइए से कराने के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिनमें दक्षिणपंथी आतंकी समूहों की कथित संलिप्तता की बात कही जा रही है। एनआइए समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट की पहले से ही जांच कर रही है|

Friday, April 1, 2011

वनवास और त्याग से साकार होगा रामराज्य


भारत विकास संगम के समापन सत्र में संगम के संरक्षक माननीय के.एन. गोविन्दाचार्य ने मंचस्थ पूज्य सिद्धेश्वर स्वामी, प्रमुख संतजन, सम्मानित अतिथि गण, मातृ शक्ति और देश के कोने-कोने से आई सज्जन शक्ति के अभिवादन के साथ अपने उद्बोध्न की शुरुआत की। प्रस्तुत है उसके मुख्य अंश
भारत विकास संगम का 10 दिवसीय अधिवेशन अपने समापन की तरफ आ रहा है। इस मंच से प्रबुद्धजनों ने जो विचार प्रकट किये हैं उनके प्रति मैं पूरा सम्मान प्रकट करता हूं। यहां के आमजनों के मन में भी कार्यक्रम के आयोजन को लेकर जो सद्भाव और पवित्रता प्रकट हुई है, वही कार्यक्रम के आयोजन की सफलता का प्रेरणादायी तत्त्व है। पूरे कार्यक्रम की सफलता किसी एक विचारधारा, विद्यालय अथवा व्यक्ति के योगदान से नहीं बल्कि सम्पूर्ण जनता की ताकत तथा साहस पूर्ण पहल का परिचय देती है। पथ का अंतिम लक्ष्य नहीं है सिंहासन चढ़ते जाना यह गीत हमारे कार्य की प्रेरणा होना चाहिए। समाज आगे, सत्ता पीछे, तभी होगा स्वस्थ विकासयह भारत विकास संगम का मूल मंत्र है। समाज में अनेकों लोग काम कर रहें हैं और एक आंकड़े के अनुसार लगभग 6 लाख गांवों में 21 लाख एनजीओ काम कर रहे हैं, फिर भी समाज में विविध समस्याओं की उपस्थिति तथा निरंतर विद्रूप होती व्यवस्था हमारे लिये एक चुनौती बन कर खड़ी है। इसलिए हमारा लक्ष्य केवल संगठन में वृदि करना नहीं होना चाहिए। इस अधिवेशन में आये हुए समस्त सज्जन शक्ति से हमारा निवेदन है कि जब हम यहां से लौटकर जायें तो यह सोच कर जायें कि हमारे केन्द्र पर अब कोई गरीबी रेखा के नीचे नहीं रहेगा, कृषि का उत्पादन दो गुना होगा, गाय-बैल की संख्या दोगुनी होगी, हम एक लाख नशामुक्त गांव खड़ा करेंगे, खून की कमी से कोई महिला नहीं मरेगी, कुपोषण का शिकार कोई बच्चा नहीं मिलेगा, यह संकल्प लेकर जाना होगा। सभी की सामूहिकता तथा संगठनों की आपसी संवाद, सहमति एवं सहकार के साथ ही ऐसी स्थिति खड़ी हो सकती है। यदि हम ठान लें तो 10 वर्षों के अन्दर इन बुराइयों का मूलोच्छेद हो सकता है। हमें इस अधिवेशन के पश्चात् अपने कार्य की एक वर्ष के अन्दर की तैयारी करनी है। समस्त जिलों में जिला विकास संगम करना है, सबको-भोजन सबको काम की योजना बना कर उसका क्रियान्वयन करना है। आप सब संगम के इस समापन सत्र से बड़ा लक्ष्य लेकर अपने-अपने क्षेत्र में जायें, यह हमारी अपेक्षा है। देश की सज्जन शक्ति के हजारों सक्रिय संगठनों/समाजसेवियों की एक डायरेक्ट्रीमार्च 2011 तक बनाई जानी चाहिए। कौन-कौन से लोग किस-किस क्षेत्रा में कैसा कार्य कर रहें हैं, ये सभी जानकारी सर्वसुलभ हो, तभी एक दूसरे के कार्य में सहकार बढ़ेगा। मैं अपील करता हूं कि अपने कार्यों व संस्थाओं का एक संक्षिप्त विवरण अवश्य उपलब्ध कराते जाएं।
यह सम्मेलन देश में तब हो रहा है जब चारों तरफ कहीं विकीलीक्स की, तो कहीं नीरा राडिया के लीक्सकी चर्चा हो रही है। ऐसे समय में सम्मेलन में 10 दिनों तक देश के प्रत्येक कोने से आये हुई सज्जन शक्ति के द्वारा भारत को दुनिया का सरताज बनाने के लिए आह्वान किया जा रहा है। देश में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है। अच्छे प्रयासों को भी समाज के पटल पर लाने की आवश्यकता है। आज समाज में चुनौतियां भी बहुत हैं, लेकिन चुनौतियां तो वीर पुरुषों के लिए अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती हैं। जिस तरह इस सम्मेलन में जुटे प्रमुख लोगों ने अपने सहयोग व समर्थन की सदाशयता दिखायी है, उससे सिद्ध है कि अच्छे कार्यों में सहयोग करने वालों की कमी कहीं भी नहीं होती है।
भारत को यदि दुनिया की महाशक्ति के रूप में देखना है तो ऐसी सोच रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान के महारथ को भगवान जगन्नाथ की रस्सी की तरह खींचने का काम करना होगा, जिसमें प्रयास तो सबका होता है परंतु रथ का संचालन ईश्वरीय सद्प्रेरणा से निरंतरता पूर्वक होता है। हम भी इस महान अभियान में बड़े कामों के लिए एक उपकरण बनें, यह सभी की इच्छा होनी चाहिए।
हमें छोटी-छोटी पांच बातों पर भी ध्यान देने की जरुरत है- पहली यह कि जाति, क्षेत्र, भाषा आदि भेदों को छोड़कर हमें रोटी, रिहाइश और रिश्ते की नयी परिभाषा व प्रयोग अनुपादित करना होगा। दूसरा यह कि अपने जीवन के आवश्यक रोजमर्रा के सामानों का उपयोग हम चाहत से देशी, जरूरत से स्वदेशी करें तथा मजबूरी में ही विदेशी करें और मजबूरी कम होती चले, इसका निरंतर प्रयास करें। तीसरा यह कि आज सीमा के घुसपैठ पर सभी जन दिलचस्पी लेकर बातें करतें हैं और मौखिक चिन्ता प्रकट करते हैं लेकिन इसके साथ ही हमें अपने मुहल्ले व पास-पड़ोस की भी चिन्ता करनी होगी और पड़ोसियों से अच्छे सम्बन्ध विकसित करने होंगे। चौथी यह कि गलत तरीके से अमीर बनने के लालच पर लगाम लगाना होगा। हमें यह तय करना होगा कि हमारी इमारत एक मंजिल कम बने मगर उसकी आधारशिला पवित्र, पारदर्शी और मजबूत हो। पांचवी यह कि हम जो भी करें उसे परिपूर्णता के साथ करें। हमारे छोटे-छोटे कामों में भी परिपूर्णता दिखनी चाहिए। उदाहरण के लिए हर रोटी गोल बने, इसका निरंतर प्रयास रोटी बनाने वाले हाथों को करना होगा।
सार्वजनिक जीवन में गलत तरीके से पैसे लेकर सही काम किया जाना असम्भव है। गलत तरीके से पैसा अर्जित करने वालों को जीवन का वास्तविक सम्मान कभी भी नहीं मिल सकता है। कुछ दिग्भ्रमित लोगों द्वारा ऐसे लोगों को सम्मानित किये जाने का प्रयास यदि किया जा रहा हो तो उसकी सामाजिक स्तर पर निन्दा और तिरस्कार होना चाहिए। समाज में जो भी अच्छे कार्य करने वाले लोग हैं उन्हें हमें निरंतर जोड़कर चलते रहना होगा। जब एक दूसरे का सहकार होगा तभी सार्थकता भी अपनी परिपूर्णता की तरफ अग्रसर होगी।
राम महत्त्वपूर्ण हैं लेकिन राम से बड़ा राम का नाम है। राम के नाम से बड़ा राम का काम है और राम का जो काम है वही रामराज्य की स्थापना है। यदि हम रामराज्य की कामना करते हैं तब रामराज्य की स्थापना के लिए हमें वनवास और त्याग करना होगा। रामराज्य की स्थापना के लिए यदि 14 वर्ष तक वनवास भोगने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम चाहिए तो भरत की तरह 14 वर्ष तक खड़ांऊ के माध्यम से त्याग का अप्रतिम उदाहरण देते हुए राज्य चलाने का साहस रखने वाला भी चाहिए। रामराज्य ऐसे नहीं आता है, रामराज्य तो तब आता है जब राम वानरों से, आदिवासियों से, शबरी से सबसे जुड़ते हैं।
व्यवस्था के परिवर्तन में तथा रामराज्य की स्थापना में हमेशा लड़ाई की शुरुआत और अन्त आम आदमी करता है। वह आम आदमी कभी हनुमान, सुग्रीव, अंगद, जामवन्त आदि के रूप में भी हो सकता है। आज देश का सामान्य आदमी ही रामराज्य लाने में सक्षम है। राम-रावण युद्ध के दौरान देवतागण केवल जय हो! जय हो! का उद्घोष कर रहे थे। उन्होंने यह नहीं सुनिश्चित किया था कि किसकी जय हो? राम की अथवा रावण की? वे तब भी युद्ध के दौरान राम की जय हो, बोलने में रावण की शक्ति से भयकंपित थे। इसलिए आज हमें देवताओं की भूमिका में जय हो! करने वालों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। जब आपके कार्यों की जय होगी तो देवतागण खुद जयगान करेंगे।
मेरा विश्वास है कि युद्ध साधनों से नहीं अपनी साधना से जीता जाता है। हमें साधन की तरफ अकर्मण्यतापूर्वक देखने की आवश्यकता नहीं। हमें अपनी साधना के द्वारा सभी साधनों को जुटा कर सम्पूर्ण परिवर्तन के युद्ध की शुरुआत करनी होगी। साधना के बल पर शुरू हुआ यह युद्ध निश्चय ही कालजयी विजय दिलाएगा। तब समाज आगे होगा और सत्ता पीछे होगी।
मंदराचल मंथन के समय बार-बार पर्वत धरातल में नीचे चला जाता था। देवताओं और दानवों को इस मंथन में जब असुविधा होने लगी तो भगवान ने कूर्मावतार लिया। मंदराचल के आधार के रूप में भगवान ने अपने को कछुए के रूप में स्थापित किया। आज जब देश में सभी सज्जन शक्तियों के सम्मेलन और सामाजिक समस्याओं पर एक वृहद् मंथन का आयोजन किया जा रहा है, ऐसे में भारत विकास संगम की भूमिका कूर्मावतार की तरह से समुपस्थित हुई है।
10 वर्ष के अन्दर भारत में समृद्ध और संस्कृति का समग्र रूप लाने में ईश्वर हम सभी को प्रेरणा, साहस तथा कौशल दे, यही प्रार्थना करते हुए मैं अपनी बात पूरी करता हूं।

Monday, March 28, 2011

ईमानदारी का पाठ पढ़ने शाखाओं में जाएं सरकारी कर्मचारी


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शासकीय सेवकों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि संघ ईमानदारी, राष्ट्र प्रेम और परिश्रम करना सिखाता है। इसलिए उसकी शाखाओं में जाने से परहेज क्यों। मुख्यमंत्री ने स्थानीय रवीन्द्र भवन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान यह टिप्पणी की। उस समय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह भैयाजी जोशी और पूर्व प्रचार प्रमुख एमजी वैद्य मंच पर मौजूद थे। चौहान ने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि वह जब मुख्यमंत्री बने तो उन्हें पता चला कि मध्य प्रदेश में संघ की शाखाओं में सरकारी अफसरों और कर्मचारियों के जाने पर रोक है। हमारी सरकार ने सारे प्रतिबंध हटा दिए हैं। शासकीय सेवक अब संघ की शाखाओं में बेधड़क जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसे हिंदुत्व में विश्र्वास करती है, जो किसी से भेदभाव नहीं सिखाता। हमारी सरकार की हर योजना में अल्पसंख्यकों को शामिल किया जाता है। संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर दिग्विजय सिंह सरकार में प्रतिबंध लगाया गया था। उनकी सरकार में संघ की शाखाओं में जाने वाले कर्मचारियों की सूची भी बनाई गई थी। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना की है। राज्य विधानसभा में कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कहा है कि मुख्यमंत्री सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों पर शाखा में जाने के लिए दबाव डालकर अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। वह अधिकारियों-कर्मचारियों की आजादी छीन रहे हैं। यह निंदनीय ह|

Tuesday, March 22, 2011

हिंदू आतंक के मामले एनआइए जांचेगी


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रचारक सुनील जोशी की हत्या के मामले में मध्य प्रदेश की सहमति नहीं मिलने के बावजूद केंद्र सरकार इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को सौंपने जा रही है। जल्दी ही जोशी हत्याकांड सहित आतंकवाद के ऐसे कई मामलों को इसे सौंपा जा रहा है। इनमें वे मामले भी शामिल हैं जिनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) पहले से ही जांच कर रहा है। हालांकि पिछले ही दिनों हुए विकिलीक्स खुलासे के अनुसार गृहमंत्री पी. चिदंबरम का मानना है कि एनआइए को राज्य की सहमति बिना जांच सौंपना संविधान के संघीय ढांचे के खिलाफ है। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक समझौता धमाके की ही तरह इस तरह के दूसरे सभी मामले एनआइए को जल्दी ही सौंप दिए जाएंगे। इसमें मध्य प्रदेश में सुनील जोशी हत्याकांड भी शामिल है। हालांकि इस मामले की जांच कर राज्य पुलिस पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का भी नाम है। साध्वी को समझौता धमाके में भी आरोपी पाया गया है। गृह मंत्रालय एनआइए को यह जांच सौंपने से पहले कानून मंत्रालय की सलाह का इंतजार कर रहा है। गृह मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से कुछ समय पहले इस बारे में कानूनी स्थिति समझनी चाही थी। क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार ने यह मामला एनआइए को सौंपने के केंद्र के अनुरोध को नहीं माना है। जबकि एनआइए कानून के मुताबिक आंतकवाद से जुड़े किसी भी मामले की जांच केंद्र बिना राज्य की सहमति के ही इसे सौंप सकती है। लेकिन पिछले दिनों ही हुए विकिलीक्स खुलासे में यह तथ्य सामने आया था कि गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने यह कानून बनने के तुरंत बाद अमेरिकी राजदूत के साथ बातचीत में उन्हें बताया था कि यह कानून भारत की संघीय भावना के खिलाफ है इसलिए अगर इसे कानूनी चुनौती मिली तो समस्या आ सकती है। सभी मामलों को एनआइए को सौंपने के पीछे गृह मंत्रालय का तर्क है कि पिछले कुछ साल के दौरान हुए एक जैसे कई मामलों की जांच कई अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं। मालेगांव में हुए एक धमाके की जांच सीबीआइ के पास है, जबकि वहीं हुए दूसरे मामले की जांच राज्य पुलिस कर रही है। इसी तरह 2007 में ही हुए मक्का मस्जिद धमाके की जांच सीबीआइ के पास है, वहीं अजमेर धमाके की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेदारी राजस्थान एटीएस के पास है। इससे जांच प्रभावित होती है और अदालती कार्यवाही में भी समस्या आती है|

मस्जिद के लिए अलग जमीन


 इसी साल जनवरी में जंगपुरा इलाके में अतिक्रमण करके बनाए गए धार्मिक स्थल को गिराने के मामले में सोमवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने उच्च न्यायालय को बताया है कि वह इस धार्मिक स्थल के बदले में इसका रखरखाव करने वाली नूर चैरिटेबल सोसायटी को एक अलग स्थान पर चार सौ गज जमीन देने के लिए तैयार है। डीडीए की तरफ से दी गई इन दलीलों के बाद न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी ने सोसायटी को कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करे। जब उनको नई जमीन मिल जाए तो वह उस जगह को खाली कर दे जिस पर पहले धार्मिक स्थल बना हुआ था। तब तक इस स्थल पर पुराने आदेश के अनुसार दस लोग ही नमाज पढ़े। डीडीए की तरफ से यह भी बताया गया कि उन्होंने गिराए गए धार्मिक स्थल के चारों और दीवार का निर्माण कर दिया है। इतना ही नहीं इस स्थल से सौ मीटर की दूरी पर वह सोसायटी को चार सौ गज जमीन देने को तैयार है। पूर्व में अदालत के आदेश के बाद डीडीए ने उसकी जमीन पर बने धार्मिक स्थल को गिरा दिया था। परंतु स्थानीय लोगों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद अदालत ने डीडीए को कहा था कि वह इस जमीन पर चार दीवारी कर दे। दो माह के अंदर समस्या का समाधान निकाला जाए तब तक दस लोग इस स्थल पर नमाज पढ़ सकेंगे। याचिकाकर्ता की तरफ से एक बार फिर कहा गया कि अदालत के पूर्व में दिए गए आदेश का पालन नहीं हो रहा है। जबकि सोसायटी की तरफ से बताया गया कि वह अदालत के आदेश का पालन करेंगे और दस से ज्यादा लोग नमाज नहीं पढ़ेगे। जिस पर अदालत ने सोसायटी व दिल्ली वक्फ बोर्ड को कहा कि वह अदालत के आदेश का आदर करे। साथ ही डीडीए को कहा कि उन्होंने जमीन के चारों तरफ दीवार बनाई है। अगर कोई उसे तोड़ता है तो उसे दोबारा बनाना उनकी जिम्मेदारी है। इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि अदालत को कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं देगी। सोसायटी व बोर्ड के वकीलों ने इस विषय पर विचार करने और कोई समाधान निकालने के लिए अदालत से कुछ समय दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह कानून का पालन करेंगे। जिस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 16 मई तक टाल दी। अदालत जंगपुरा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है|

Sunday, March 6, 2011

मालेगांव धमाके में एटीएस ने बिना सबूत बनाए आरोपी


सीबीआइ ने वर्ष 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट की नए सिरे से जांच की मांग के बीच रविवार को संकेत दिया कि मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने इस मामले को सुलझाने में काफी जल्दी दिखाई। इसका नतीजा यह हुआ कि एटीएस ने दो लोगों को इस बात का ध्यान रखे बिना ही आरोपी बना दिया कि घटना के समय उनमें से एक जेल में था, जबकि दूसरा शहर से 700 किलोमीटर दूर। एटीएस के आरोपपत्र में दावा किया गया है कि विस्फोट कांड के मुख्य आरोपी में से एक मोहम्मद जाहिद आठ सितंबर को मालेगांव में मौजूद था जब तीन विस्फोट हुए जिसमें 35 से अधित व्यक्तियों की मौत हो गई थी। सीबीआइ मालेगांव विस्फोट की गुत्थियों को सुलझाने की कोशिश कर रही है। उसके पास इस बात को प्रमाणित करने के लिए प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं कि विस्फोट वाले दिन जाहिद मालेगांव से 700 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व कर रहा था। सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जाहिद पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामी मूवमेंट ऑफ इंडिया की गतिविधियों में शामिल था। बहरहाल, वह विस्फोट स्थल पर मौजूद नहीं था। सीबीआइ ने यह भी दावा किया उसके पास धमाके के महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी के बयान भी दर्ज हैं। प्रत्यक्षदर्शी ने जांच एजेंसी को बताया था कि मालेगांव में बम रखने वाले को दाढ़ी नहीं थी, जबकि एटीएस ने जिसे आरोपी बनाया है उसने सालों से दाढ़ी बढ़ा रखी है। सीबीआइ को और भी कई ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चलता है कि एटीएस ने जांच में जल्दबाजी दिखाई। गौरतलब है कि इस सारी जांच में उस समय नया मोड़ आ गया था जब संघ से जुड़े स्वामी असीमानंद ने मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान दिया दिया कि मालेगांव विस्फोट के पीछे हिंदू कट्टरपंथियों का हाथ है। इसके बाद इस पूरे मामले की मुंबई एटीएस से लेकर जांच सीबीआइ को सौंपी गई|

Tuesday, March 1, 2011

पाकिस्तान से नाता तोड़ते हिंदू


पिछले दिनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत की विधानसभा के एक सदस्य अपना देश हमेशा के लिए छोड़ कर भारत में बस गए। राम सिंह सोढो ने भारत से अपना त्यागपत्र भेज दिया, जिसमें लिखा है कि स्वास्थ्य बेहतर नहीं है और डॉक्टर ने दो साल आराम की सलाह दी है। सिंध विधानसभा के अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हम जानते हैं कि राम सिंह के त्यागपत्र का कारण सेहत की खराबी नहीं हो सकता। हो सकता है कि उनकी सेहत वास्तव में खराब हो, लेकिन यह देश छोड़ने का कारण तो नहीं हो सकता। राम सिंह पहले ऐसे राजनेता नहीं हैं, जिन्होंने अपना देश छोड़ कर भारत का रुख किया है। इससे पहले भी चार सदस्य भारत में बस चुके हैं। सबसे पहले देश छोड़ने वाले पाकिस्तान के पहले विधिमंत्री जगन्नाथ मंडल थे। इसके बाद संसद सदस्य लक्ष्मण सिंह ने वर्ष 1973 में देश को अलविदा कहा और हमेशा के लिए भारत में आबाद हो गए। राम सिंह से पहले महरूमल जगवाणी भी भारत को अपना चुके हैं। वह सिंध विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। पाकिस्तान के संविधान के अनुसार सब नागरिक बराबर हैं। संविधान कहता है कि सभी धर्मो के लोग एक जैसे हैं, सबके अधिकार बराबर हैं और सबको धर्म की मुकम्मल आजादी है। ये बातें संविधान में तो हैं, लेकिन सच क्या है, यह देखना जरूरी है। अगर यह सब सच होता या इस पर अमल होता तो लोग इस तरह अपना देश नहीं छोड़ते जिस तरह राम सिंह या इन जैसे कई लोग छोड़ चुके हैं। ये हालत इसलिए पैदा होते हैं, क्योंकि पाकिस्तान में कोई भी देश के संविधान की परवाह नहीं करता। आतंकवाद, चरमपंथ के साथ देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। दो-तीन मामले हैं जिनको लेकर हिंदू परेशान हैं। एक तो हिंदुओं को लगता है कि उनकी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। हिंदुओं को शिकायत है कि राज्य उनकी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं करता। यह शिकायत सही भी है। पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून और दूसरे कानूनों के दुरुपयोग का डर भी हिंदुओं के सिर पर सवार रहता है। एक रिपोर्ट आई है कि पाकिस्तान से रोजाना एक हिंदू परिवार दूसरे देश में प्रवास कर रहा है। अगर इस बात को सच न भी माना जाए तो भी यह सच जरूर है कि देश के 60 प्रतिशत हिंदू देश छोड़ने की सोचते जरूर हैं। हिंदू समूहों की त्रासदी यह है कि वे देश में रहना चाहते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। दूसरी ओर भारत उन्हें कबूल नहीं करता। कई सियासी लोगों से हमने सुना है कि देश में हमें कोई पूछता नहीं और भारत भी कहता है कि तुम्हें हम कोई सुविधा नहीं दे सकते। हम आखिर जाएं तो कहां जाएं। यह कहा जा सकता है कि अगर पाकिस्तान और भारत के बीच वीजा प्रणाली आसान होती तो कई हिंदू देश छोड़ चुके होते। देश के हिंदू भी इतने ही देशभक्त और प्रतिबद्ध हैं जितने मुसलमान। फिर भी अल्पसंख्यक होने की वजह से वे इस डर में जीते हैं कि कहीं उन पर यह आरोप न लग जाए कि वे भारत से जुड़े हैं। पाकिस्तान में अधिकांश हिंदू सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में बसते हैं। दोनों प्रांतों में उन समूहों की हालत अच्छी नहीं है। दोनों प्रांतों के कई शहरों से अपहृत हुए हिंदू आज भी वापस घर नहीं लौट सके हैं। बलूचिस्तान में काम करने वाले मानवाधिकार आयोग के निदेशक सईद अहमद का कहना है कि प्रांत में अपहरण के कारण हिंदुओं में ज्यादा डर है। इस कारण ही वे तेजी से देश से पलायन कर रहे हैं। अधिकांश हिंदू भारत जाते हैं। अगर वहां नहीं जा पाते तो दूसरे देश में जाने की कोशिश करते हैं, जिसके लिए वे अपनी संपत्ति सस्ते दामों में बेच देते हैं। सिंध प्रांत में जैकब आबाद जिले में रहने वाले हिंदू भी मुश्किल में हैं। यह वह जिला है, जहां तीन साल के बच्चों का भी अपहरण हो चुका है। वहां से भी रिपोर्ट है कि काफी हिंदू भारत चले गए हैं। जो शेष रह गए हैं वे भी जाने की बातें कर रहे हैं। मेरा मानना है कि दोनों देशों की जनता को खुली छूट होनी चाहिए कि वे जहां जाना चाहें, वहां जा सकते हैं। अगर इस तरह का माहौल हो तो किसी को देश छोड़ने की जरूरत ही पेश नहीं आएगी। दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के पास जाएंगे, मेलमिलाप का एक बहाना होगा, लेकिन दुर्भाग्य है कि दोनों देशों ने जनता के लिए इतने कठिन नियम बना दिए हैं कि एक-दूसरे के देश आने-जाने की सोच भी नहीं पाते। दूतावास अधिकारियों को भी शायद ऐसा ही प्रशिक्षण मिलता है जो खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों को दिया जाता है। यानी जो भी पाकिस्तान से भारत जाए, उसे जासूस समझा जाए। दिल्ली में पाकिस्तान के दूतावास का भी यही हाल होगा। इस सवाल का जवाब मुश्किल नहीं है कि पाकिस्तान और भारत की विदेश नीतियों से जनता में प्यार बढ़ता है या नफरत? देश जनता से बनते हैं। जनता को संतुष्ट करने के लिए सब-कुछ करना चाहिए। दुश्मनी के सिवा भी कुछ सोचा जाना चाहिए। (लेखक पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Monday, February 28, 2011

सम्मानित व सुरक्षित घर वापसी करेंगे कश्मीरी हिंदू


 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कश्मीर से हिंदुओं के विस्थापित होने के पीछे राजनीति को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि हिंदू सम्मानित और सुरक्षित होकर अपने घर वापस लौटेंगे। भागवत ने रविवार को यहां जम्मू-कश्मीर विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित शिवरात्रि महोत्सव में उपस्थित कश्मीरी परिवारों को संबोधित करते हुए कहा, सीधी सी बात है कि कश्मीर में रहने वाले लोग कश्मीर में ही रहेंगे। इसे लेकर बेकार में भारी बवाल हो रहा है और उल्टी नीति चल रही है क्योंकि इसके पीछे राजनीति आ गई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में कश्मीर से चार लाख हिंदू विस्थापित हो गए। अपने घर सम्मान के साथ वापस जाना उनका अधिकार है इसलिए जब तक हिंदू सम्मानित, सुरक्षित नहीं हो जाएं तब तक कश्मीर वापस नहीं जाएं। भागवत ने कहा कि स्वतंत्र भारत में इस तरह की अराजकता हो रही है और कानून की बात आती है तो कहा जाता है वहां धारा 370 है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी बात है तो धारा 370 को हटाया क्यों नहीं जाता। उस स्थिति को बदलना चाहिए जो आजाद भारत में नागरिकों को सम्मान और सुरक्षा के साथ नहीं रहने देती। भागवत ने कश्मीरी पंडित परिवारों से आह्वान किया कि वे अपनी आने वाली पीढि़यों में भी इस भाव को बनाए रखें और अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखें। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में कट्टरपंथी लोग हैं जिनके कारण लोगों को विस्थापित होना पड़ता है। भारत में पूर्वाचल में गारो जाति इस व्यथा का उदाहरण है। सारे देश को इस स्थिति को समझना होगा। भाजपा का नाम लिए बिना संघ प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में राजनीतिक लोग भी काम कर रहे हैं जो वहां तिरंगा फहराते हैं। एक बार वे सफल हो गए लेकिन दूसरी बार उन्हें सफल नहीं होने दिया गया और कुछ दूरी पर रोक लिया गया। इस मौके पर भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष स्मृति ईरानी ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को लेकर नारे दिए जाते हैं लेकिन वे आज तक अपनी वापसी की तैयारी नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, लेकिन जब हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे तो देश का राजनीतिक दृष्टिकोण बदलेगा और हम अपनी बात मनवाकर रहेंगे। इस अवसर पर सामूहिक शंखनाद भी किया गया। इससे पहले भागवत और स्मृति को परंपरागत कश्मीरी वेशभूषा पहनाकर उनका सम्मान किया गया|

मलेशिया में 100 से अधिक हिंदू गिरफ्तार


मलेशिया में रविवार को हिंदुओं के प्रतिबंधित संगठन हिंद्राफ से जुड़े एक समूह के 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारियां उस वक्त हुई जब ये मलय भाषा में लिखे विवादास्पद उपन्यास इंटरलोक को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के विरोध में रैली निकाल रहे थे। देश में भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी पार्टी मलेशियन इंडियन कांग्रेस (एमआइसी) सहित अल्पसंख्यक समुदाय का मानना है कि उपन्यास में भारतीय मूल के लोगों को लेकर आपत्तिजनक टिप्प्णी की गई हैं। गिरफ्तार लोगों में आठ महिलाएं भी हैं। ये हिंदू राइट्स एक्शन फोर्स (हिंद्राफ) के ह्यूमन राइट्स पार्टी समूह से जुड़ी हैं। सरकार ने इस रैली को अवैध घोषित किया था। शहर के पुलिस उपायुक्त जे. अब्दुल्ला ने कहा कि यह गिरफ्तारियां शहर की कानून और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए की गई हैं। उन्होंने कहा, हमें खेद है, लेकिन हम उन्हें कई बार रैली नहीं निकालने की चेतावनी दे चुके हैं। उसके बावजूद रैली निकालना कानून के प्रति उनके गैरजिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। सरकार ने हालांकि आश्वासन दिया है कि संशोधन के बाद ही पुस्तक को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया|

Thursday, February 17, 2011

भगवा आतंक की राजनीति


हिंदुत्ववादी संगठनों के खिलाफ मोर्चा पर रमेश शर्मा की टिप्पणी
आतंकवाद पर हर सरकार का अपना नजरिया होता है। यह नजरिया उसकी फाइलों में और उसके द्वारा लिखाए गए इतिहास में साफ दिखता है। बादशाह औरंगजेब ने शिवाजी को आतंकवादी घोषित करके जिंदा अथवा मुर्दा पकड़ने का हुक्म सुनाया था। अंग्रेजों ने सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद को आतंकवादी माना था। मुगल समर्थक इतिहास की किताबों में आज भी शिवाजी को आतंकवादी लिखा जाता है। आतंकवाद पर सरकारों के नजरिए का यह एक उदाहरण है। इसके अतिरिक्त गुरुगोविंद सिंह, गुरु तेगबहादुर हरि सिंह नलवा, तात्याटोपे आदि को भी तत्कालीन सरकारों ने आतंकवादी माना था। इन तमाम लोगों के प्रति भारतीय समाज में आदर है। ये तमाम विभूतियां राष्ट्र के लिए अपनी जिंदगियां न्यौछावर कर गए। जब प्रधानमंत्री अथवा उनकी सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को या उसके किसी प्रचारक को आतंकवाद की घटनाओं में लिप्त घोषित करती है तो मिश्रित प्रतिक्रिया होती है। आरएसएस के बारे में दो बातें बहुत साफ हैं। एक तो उसकी और उसके सेवकों की निष्ठा राष्ट्र के प्रति असंदिग्ध है और दूसरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी भी न तो हिंसा का समर्थन किया है और न हिंसा को कभी प्रश्रय दिया है। बावजूद इसके मालेगांव और अजमेर विस्फोट जैसी वारदातों में संघ के स्वयंसेवकों के नाम सामने आने पर पूरे देश में सनसनी-सी फैली। इससे कांग्रेस को मौका मिला है आरएसएस पर हमला करने का और इस हमले के बहाने अपनी राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा को दबाने का। इससे भारत को भीतर से कमजोर करने वाली ताकतें प्रसन्न हैं। निसंदेह देश में जितने भी आतंकवादी हमले हुए उनमें राष्ट्रबोध मजबूत हुआ और संघ के सेवकों ने अपनी सेवा से जन सहानुभूति भी बटोरी है। माना जाता है कि संघ द्वारा अर्जित सहानुभूति चुनाव में भाजपा की ओर झुक जाती हैं। कांग्रेस की यही चिंता भी है। कांग्रेस की चिंता तब और पैनी होती है जब उसे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे प्रांतों में पराजय मिलती है अथवा आंध्र जैसे प्रांत से सत्ता की डगमगाहट की खबरें आती हैं। वह आरएसएस पर हमला तेज करती है ताकि मीडिया का ध्यान बिहार में हार के विश्लेषण के बजाय आरएसएस और आतंकवाद की विवेचना की ओर मुड़ जाए। कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती है कि भारत में आतंकवाद का मार्ग पाकिस्तान और चीन की सीमा से निकलता है, लेकिन यह आतंक कितना ही भयानक क्यों न हो, राष्ट्र के लिए कितना ही घातक क्यों न हो फिर भी उसकी सरकार को नुकसान नहीं है इसीलिए वह इस आतंकवाद पर हमला नहीं करती। इस आतंकवाद के समर्थन में दिल्ली में खुलेआम बयानबाजी पर वह गिलानी या अरुंधती पर कोई कार्रवाई नहीं करती। कांग्रेस को हिंदुत्ववादी संगठनों से खतरा दिखता है इसलिए वह उनके खिलाफ मोर्चा खोल देती है। यह सरकार की अपनी शैली है जिसमें वह आतंकवाद की परिभाषा गढ़ती है और किसी को भी आतंकवादी घोषित करके इतिहास बना देती है। वस्तुत: भारत की तमाम सरकारों को प्रखर राष्ट्रवाद से ही खतरा रहा है इसीलिए भारत सरकार का चरित्र ही ऐसा बन गया है कि वह राष्ट्रवाद से चौंके और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को प्राथमिकता देने से परहेज करे। उनके विरुद्घ जितने दमन हो सकते हैं, जितने प्रतिबंध हो सकते हैं वह लगाए। ऐसा शकों के शासन में भी था और कुषाणों के शासन में भी। ऐसा तुर्को के शासन में भी था और पठानों के में भी, ऐसा मुगलों के शासन में भी था और अंग्रेजों के शासन में भी इसीलिए आजादी के बाद की तमाम सरकारों का स्वभाव है कि जो लोग सत्ता के बाहर प्रखर राष्ट्रवाद की बात करते हैं उन्हें दबाया जाए। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

Tuesday, February 15, 2011

हिंदू कट्टरपंथ अभी बड़ा खतरा नहीं : पिल्लै


सरकार का मानना है कि देश में हिंदू कट्टरपंथ (दक्षिणपंथी तत्वों) का उभरना चिंता की बात है लेकिन अभी यह बड़ा खतरा नहीं है। केंद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने कहा, इन्हें फलने-फूलने दिया गया तो देश की सुरक्षा के लिए यह खतरा बन सकता है। पिल्लै ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, हमें जो भी खुफिया जानकारी मिल रही हैं उसके आधार पर फिलहाल दक्षिण कट्टरपंथी बड़ा खतरा नहीं हैं लेकिन कट्टरपंथी संगठनों की संख्या बढ़ना चिंता की बात तो है ही। स्वामी असीमानंद द्वारा 2006 के मालेगांव विस्फोट में हिन्दू समूहों के हाथ होने की बात स्वीकारे जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा, पूर्व के विस्फोटों में निर्दोष युवकों को फंसाने के लिए जो भी पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह पूछने पर कि मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस विस्फोट जैसे मामलों में अब दक्षिण कट्टरपंथी संगठनों के कथित रूप से शामिल होने का खुलासा होने के बाद ऐसे मामलों में शुरुआत में गिरफ्तार मुस्लिमों की रिहाई के संबंध में पूछे जाने पर पिल्लै ने कहा कि निर्दोष मुस्लिम युवकों को रिहा करने की प्रक्रिया चल रही है। गृह सचिव ने कहा कि दक्षिणपंथी हो या कोई अन्य, आतंकी देश का दुश्मन होता है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह के कट्टरपंथी समूहों के फलने फूलने का जोखिम नहीं उठा सकता है। हमारा मानना है कि दक्षिणपंथी कट्टरवादी समूह अभी बहुत सीमित हैं। ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटने का संकेत देते हुए पिल्लै ने कहा, हमारे दृष्टिकोण से आतंकवाद में संलग्न हर व्यक्ति देश का शत्रु है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, पाक से समझौता विस्फोट से जुड़ी जानकारी अवश्य साझा की जाएगी लेकिन आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, क्योंकि जांच अभी चल रही है। पाक समझौता कांड से जुड़ी जानकारी लगातार मांग रहा है। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है और इस सिलसिले में गिरफ्तार असीमानंद से पूछताछ की जा रही है। पिल्लै ने कहा कि अभी भी कई लोग गिरफ्तार नहीं हो पाए हैं। यह पूछने पर कि समझौता मामले सहित कुछ आतंकी घटनाओं में कथित तौर पर दक्षिणपंथी संगठनों के लिप्त होने से भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में किसी तरह का कोई असर तो नहीं पड़ेगा या फिर भारत को किसी तरह का दबाव तो नहीं झेलना होगा, पिल्लै ने कहा कि दबाव तो है लेकिन इसका बातचीत पर कोई असर नहीं होगा। क्योंकि लोकतंत्र में लोग इस तरह की बातों को अच्छी तरह समझते हैं। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हेमंत करकरे के बीच कथित बातचीत का मुंबई हमले से कोई लेना-देना था या नहीं, इस सवाल पर पिल्लै ने कहा कि मैं नहीं मानता। उनकी बातचीत का मुंबई आतंकी हमले से कोई लेना-देना नहीं है।

Monday, February 14, 2011

40 साल बाद अस्थियों को नसीब हुई गंगा की गोद


पाकिस्तान से विसर्जन के लिए हरिद्वार लाई गई 135 हिंदुओं की अस्थियां 40 साल के लंबे इंतजार के बाद रविवार को विधि विधान के साथ गंगा में विसर्जित कर दी गयीं। इससे पहले पहले शहर में बैंड बाजों के साथ अस्थि कलश यात्रा निकाली गई। पाकिस्तान से आए बारह सदस्यीय दल ने हरिद्वार में अस्थियों को विसर्जित किया। उल्लेखनीय है कि भारत का वीजा न मिलने के चलते यह अस्थियां पिछले करीब चालीस साल से पाक में संभालकर रखी गई थी। यह अस्थि कलश शनिवार देर रात दिल्ली से हरिद्वार पहुंचे और इन्हें निष्काम सेवा सदन में रखा गया था। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने रविवार सुबह हरिद्वार के निष्काम सेवा सदन से अस्थि कलश यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बैंड-बाजों के साथ अस्थि कलश यात्रा का जगह जगह पर शहरवासियों ने स्वागत किया। दोपहर करीब दो बजे कनखल सती घाट में विधि-विधान से अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर दिया गया। इसके लिए पाकिस्तान के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्र की अगुवाई में मंदिर के 12 सेवक हरिद्वार आए थे। अस्थि विसर्जन के मौके पर धर्मयात्रा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगे राम, श्री देवोत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र, कालिका पीठाधीश्र्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी, समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पाकिस्तान के कराची शहर मेंस्थित हिंदू क्रिमिनेशन ग्राउंड के एक कमरे में 135 दिवंगत व्यक्तियों के अस्थि कलश चालीस साल से रखे हुए थे। भारत का वीजा न मिल पाने के चलते इनका गंगा में विसर्जन नहीं हो पा रहा था। करीब चार साल पहले दिल्ली स्थित श्री देवोत्थान समिति को इस बारे में पता चला। फिर इन अस्थि कलशों को भारत लाकर गंगा में प्रवाहित करने की मुहिम शुरू हुई। पाकिस्तान के कराची शहर में श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्र से समिति ने संपर्क किया। तमाम प्रयासों के बाद आखिरकार इस मुहिम को आज मंजिल तक पहुंचाया गया।